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बेख़ुद देहलवी

1863 - 1955 | दिल्ली, भारत

दाग़ देहलवी के शिष्य

दाग़ देहलवी के शिष्य

ग़ज़ल

आप हैं बे-गुनाह क्या कहना

नोमान शौक़

आशिक़ समझ रहे हैं मुझे दिल लगी से आप

नोमान शौक़

आशिक़ हैं मगर इश्क़ नुमायाँ नहीं रखते

नोमान शौक़

ऐसा बना दिया तुझे क़ुदरत ख़ुदा की है

नोमान शौक़

कब तक करेंगे जब्र दिल-ए-ना-सुबूर पर

नोमान शौक़

ख़ुदा रक्खे तुझे मेरी बुराई देखने वाले

नोमान शौक़

दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर

नोमान शौक़

दोनों ही की जानिब से हो गर अहद-ए-वफ़ा हो

नोमान शौक़

पछताओगे फिर हम से शरारत नहीं अच्छी

नोमान शौक़

बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो ये क्या करते हो

नोमान शौक़

बेताब रहें हिज्र में कुछ दिल तो नहीं हम

नोमान शौक़

मुझ को न दिल पसंद न वो बेवफ़ा पसंद

नोमान शौक़

माशूक़ हमें बात का पूरा नहीं मिलता

नोमान शौक़

लड़ाएँ आँख वो तिरछी नज़र का वार रहने दें

नोमान शौक़

वो देखते जाते हैं कनखियों से इधर भी

नोमान शौक़

हर एक बात तिरी बे-सबात कितनी है

नोमान शौक़

हिजाब दूर तुम्हारा शबाब कर देगा

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI