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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

1911 - 1984 | लाहौर, पाकिस्तान

सबसे प्रख्यात एवं प्रसिद्ध शायर. अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण कई साल कारावास में रहे।

सबसे प्रख्यात एवं प्रसिद्ध शायर. अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण कई साल कारावास में रहे।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की चित्र शायरी

जो मेरा तुम्हारा रिश्ता है

याद

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही

नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं

हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम

रात यूँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई

हम मुसाफ़िर यूँही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे

याद

हज़ार दर्द शब-ए-आरज़ू की राह में है

हम शैख़ न लीडर न मुसाहिब न सहाफ़ी

वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे

जानता है कि वो न आएँगे

आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान

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