aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
noImage

ग़ुफ़रान अमजद

1959 | बैंगलोर, भारत

ग़ुफ़रान अमजद

ग़ज़ल 7

नज़्म 1

 

अशआर 3

कोई जुगनू कोई तारा कोई सूरज कोई चाँद

और अजब बात कि महरूम-ए-उजाला सब हैं

  • शेयर कीजिए

कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया

शुक्र है दश्त में सैलाब तो आया

नवाह-ए-लफ़्ज़-ओ-मआनी में गूँज है किस की

कोई बताए ये 'अमजद' कि हम बताएँगे

 

पुस्तकें 1

 

ऑडियो 3

अजब था ज़ोम कि बज़्म-ए-अज़ा सजाएँगे

कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया

अभी आइना मुज़्महिल है

Recitation

 

"बैंगलोर" के और शायर

Recitation

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

GET YOUR FREE PASS
बोलिए