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मोहम्मद आज़म

1941 | बैंगलोर, भारत

नई ग़ज़ल के प्रतिष्ठित शायर

नई ग़ज़ल के प्रतिष्ठित शायर

ग़ज़ल 23

नज़्म 8

शेर 3

आसमानों में उड़ा करते हैं फूले फूले

हल्के लोगों के बड़े काम हवा करती है

उतारो बदन से ये मोटे लिबास

नहीं देखतीं गर्मियाँ गईं

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हमारे दिल को अब ताक़त नहीं सदमे उठाने की

बहुत भाने लगे जो उस से मिलना छोड़ देते हैं

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वीडियो 25

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Dekhha ke chale jaate the sab shauq ke maare

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Garan tha matn mushkil aur bhi tabeer padh lena

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Hafs e Talluq mein door na ja idhar udhar

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Hone ko ab kya dekhiye kya kuch hai aur kya kuch nahin

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Hum aadamzad jo hain Roz e Awwal se kami hai ye

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Kamaan sonp ke dushman ko apne lashkar ki

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Kuch garaz humko nahin hai ke kahan le jaaye

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Subuk mujhko mohabbat mein

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Talab karegi jaan aarzoo ki jaan aarzoo

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

Ye nashe aagahi khatarnak hai sar mein

One of the most prominent contemporary ghazal poet in India. Mohammad Azam reciting his ghazals at Rekhta Studio. मोहम्मद आज़म

इक नश्तर-ए-निगाह है इस से ज़ियादा क्या

मोहम्मद आज़म

कुछ ग़रज़ हम को नहीं है कि कहाँ ले जाए

मोहम्मद आज़म

कमान सौंप के दुश्मन को अपने लश्कर की

मोहम्मद आज़म

गुदाज़ तक ही ख़राबी हुनर सँभालेगा

मोहम्मद आज़म

गिराँ था मत्न मुश्किल और भी ताबीर पढ़ लेना

मोहम्मद आज़म

तलफ़ करेगी कब तक आरज़ू की जान आरज़ू

मोहम्मद आज़म

देखा कि चले जाते थे सब शौक़ के मारे

मोहम्मद आज़म

ये नश्शा-ए-आगाही ख़तरनाक है सर में

मोहम्मद आज़म

रक्खा था जिसे दिल में वो अब है भी नहीं भी

मोहम्मद आज़म

सब है ज़ेर-ए-बहस जो ज़ाहिर है या पोशीदा है

मोहम्मद आज़म

सुबुक मुझ को मोहब्बत में ये कज-उफ़्ताद करता है

मोहम्मद आज़म

हब्स तअल्लुक़ात में दूर न जा इधर उधर

मोहम्मद आज़म

हम आदम-ज़ाद जो हैं रोज़-ए-अव्वल से कमी है ये

मोहम्मद आज़म

हँसी में टाल रहे हो तुम उस के रोने को

मोहम्मद आज़म

होने को अब क्या देखिए क्या कुछ है और क्या कुछ नहीं

मोहम्मद आज़म

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