Hasan Akbar Kamal's Photo'

हसन अकबर कमाल

1946 - 2017 | पाकिस्तान

101
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

कल यही बच्चे समुंदर को मुक़ाबिल पाएँगे

आज तैराते हैं जो काग़ज़ की नन्ही कश्तियाँ

वफ़ा परछाईं की अंधी परस्तिश

मोहब्बत नाम है महरूमियों का

पाया जब से ज़ख़्म किसी को खोने का

सीखा फ़न हम ने बे-आँसू रोने का

टूटे और कुछ दिन तुझ से रिश्ता इस तरह मेरा

मुझे बर्बाद कर दे तू मगर आहिस्ता आहिस्ता

दिए बुझाती रही दिल बुझा सके तो बुझाए

हवा के सामने ये इम्तिहान रखना है

गए दिनों में रोना भी तो कितना सच्चा था

दिल हल्का हो जाता था जब अश्क बहाने से

दिल में तिरे ख़ुलूस समोया जा सका

पत्थर में इस गुलाब को बोया जा सका

एक दिया कब रोक सका है रात को आने से

लेकिन दिल कुछ सँभला तो इक दिया जलाने से

बड़ों ने उस को छीन लिया है बच्चों से

ख़बर नहीं अब क्या हो हाल खिलौने का

बनाए जाता था मैं अपने हाथ को कश्कोल

सो मेरी रूह में ख़ंजर उतरता जाता था

क्या तर्जुमानी-ए-ग़म-ए-दुनिया करें कि जब

फ़न में ख़ुद अपना ग़म भी समोया जा सका