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इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

1727 - 1755 | दिल्ली, भारत

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन और उनके प्रतिद्वंदी के तौर पर प्रसिद्ध। उन्हे उनके पिता ने क़त्ल किया।

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन और उनके प्रतिद्वंदी के तौर पर प्रसिद्ध। उन्हे उनके पिता ने क़त्ल किया।

ग़ज़ल

इस क़दर ग़र्क़ लहू में ये दिल-ए-ज़ार न था

फ़सीह अकमल

बहार आई है क्या क्या चाक जैब-ए-पैरहन करते

फ़सीह अकमल

मिस्र में हुस्न की वो गर्मी-ए-बाज़ार कहाँ

फ़सीह अकमल

ये वो आँसू हैं जिन से ज़ोहरा आतिशनाक हो जावे

फ़सीह अकमल

शहर में था न तिरे हुस्न का ये शोर कभू

फ़सीह अकमल

सरीर-ए-सल्तनत से आस्तान-ए-यार बेहतर था

फ़सीह अकमल

हक़ मुझे बातिल-आशना न करे

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI