ग़ज़ल 15

शेर 8

मिरे अक़ब में है आवाज़ा-ए-नुमू की गूँज

है दश्त-ए-जाँ का सफ़र कामयाब अपनी जगह

वो इक लम्हा जो तेरे क़ुर्ब की ख़ुशबू से है रौशन

अब इस लम्हे को पाबंद-ए-सलासिल चाहता हूँ मैं

चार जानिब चीख़ती सम्तों का शोर

हाँपते साए थकन और इन्हितात

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पुस्तकें 12

Aakhri Darvesh

 

1993

Ehtisab

Anwar Sheikh Ki Ghazal Ka Tanqeedi-o-Taqabuli Mutala

2004

Fana Nizami : Fan Aur Shakhsiyat

 

2003

Haft Purkar

 

1984

Harf-e-Baryab

 

2007

Imshab

 

1990

Istifham

 

2014

Kulliyat-e-Shair

 

2013

Naqsh-e-Nawan

 

2008

Nishat-e-Fikr

Allama Kausar Jaisi Fan Aur Shakhsiyat

2006

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