noImage

क़ौसर जायसी

1916 - 2005 | कानपुर, भारत

ग़ज़ल 11

शेर 10

कभी कभी सफ़र-ए-ज़िंदगी से रूठ के हम

तिरे ख़याल के साए में बैठ जाते हैं

ये आरज़ू के सितारे ये इंतिज़ार के फूल

चमक रही हैं ख़ताएँ महक रहे हैं गुनाह

अपने ग़म की फ़िक्र की इस दुनिया की ग़म-ख़्वारी में

बरसों हम ने दस्त-ए-जुनूँ से काम लिया दानाई का

पुस्तकें 2

Kamin Gah-e-Khayal

 

1981

Nishat-e-Fikr

Allama Kausar Jaisi Fan Aur Shakhsiyat

2006

 

"कानपुर" के और शायर

  • मतीन नियाज़ी मतीन नियाज़ी
  • फ़रहत कानपुरी फ़रहत कानपुरी
  • नामी अंसारी नामी अंसारी
  • नाज़िर सिद्दीक़ी नाज़िर सिद्दीक़ी
  • इशरत ज़फ़र इशरत ज़फ़र
  • शोएब निज़ाम शोएब निज़ाम
  • अबुल हसनात हक़्क़ी अबुल हसनात हक़्क़ी
  • असलम महमूद असलम महमूद
  • हसन अज़ीज़ हसन अज़ीज़
  • फ़ना निज़ामी कानपुरी फ़ना निज़ामी कानपुरी