Khalid Ebadi's Photo'

ख़ालिद इबादी

1971 | पटना, भारत

पत्रकार, उत्तर-आधुनिक शायरों में सशक्त अभिव्यक्ति के लिए प्रख्यात

पत्रकार, उत्तर-आधुनिक शायरों में सशक्त अभिव्यक्ति के लिए प्रख्यात

ख़ालिद इबादी

ग़ज़ल 9

अशआर 8

शहर का भी दस्तूर वही जंगल वाला

खोजने वाले ही अक्सर खो जाते हैं

कभी कभी चुप हो जाने की ख़्वाहिश होती है

ऐसे में जब तीर-ए-सितम की बारिश होती है

अभी मरने की जल्दी है 'इबादी'

अगर ज़िंदा रहे तो फिर मिलेंगे

हमारे हाथ काटे जा रहे थे

तुम्हारे हाथ से किरपान ले कर

  • शेयर कीजिए

मैं ज़ख़्म ज़ख़्म नहीं हूँ मगर मसीहाई

मिरे बदन में मिरी जान क्यूँ नहीं रखती

पुस्तकें 5

 

संबंधित शायर

"पटना" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए