Khursheed Rizvi's Photo'

ख़ुर्शीद रिज़वी

1942 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 52

नज़्म 15

शेर 25

तू मुझे बनते बिगड़ते हुए अब ग़ौर से देख

वक़्त कल चाक पे रहने दे रहने दे मुझे

हैं मिरी राह का पत्थर मिरी आँखों का हिजाब

ज़ख़्म बाहर के जो अंदर नहीं जाने देते

ये दौर वो है कि बैठे रहो चराग़-तले

सभी को बज़्म में देखो मगर दिखाई दो

ई-पुस्तक 1

यकजा (कुल्लियात)

 

2012

 

चित्र शायरी 2

आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा

आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा

 

वीडियो 5

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Dr. Khurshid Rizvi at a mushaira

ख़ुर्शीद रिज़वी

Khurshid Rizvi at a mushaira in Pakistan in 2011

ख़ुर्शीद रिज़वी

phir naya saal naya maah-emoharram aya

ख़ुर्शीद रिज़वी

sab kahe deti hai ashkon ki ravani afsos

ख़ुर्शीद रिज़वी

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए

ख़ुर्शीद रिज़वी