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महेश चंद्र नक़्श

1922 - 1980 | दिल्ली, भारत

डी टी सी ट्रैफिक इंस्पेक्टर,ग़ज़लों और क़ितआत के लिए मशहूर

डी टी सी ट्रैफिक इंस्पेक्टर,ग़ज़लों और क़ितआत के लिए मशहूर

ग़ज़ल 26

शेर 24

इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी

हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है

तस्कीन दे सकेंगे जाम-ओ-सुबू मुझे

बेचैन कर रही है तिरी आरज़ू मुझे

उन के गेसू सँवरते जाते हैं

हादसे हैं गुज़रते जाते हैं

क़ितआ 23

ई-पुस्तक 8

अंदाज़

 

1962

Darpan

 

1981

Darpan

 

1981

Darpan

 

1981

Deewarein

 

1973

Khiram

 

1955

Khiram

 

1956

Khiram

 

 

 

चित्र शायरी 1

तस्वीर-ए-ज़िंदगी में नया रंग भर गए वो हादसे जो दिल पे हमारे गुज़र गए दुनिया से हट के इक नई दुनिया बना सकें कुछ अहल-ए-आरज़ू इसी हसरत में मर गए निकला जो क़ाफ़िले से नई जुस्तुजू लिए कुछ दूर साथ साथ मिरे राहबर गए नैरंगियाँ चमन की पशेमान हो गईं रुख़ पर किसी के आज जो गेसू बिखर गए फूटी जो उस जबीं से इनायत की इक किरन मग़्मूम आरज़ूओं के चेहरे निखर गए हर शय से बे-नियाज़ रहे जिन में हुस्न ओ इश्क़ ऐ ज़िंदगी बता कि वो लम्हे किधर गए ऐ 'नक़्श' कर रहा था जिन्हें ग़र्क़ नाख़ुदा तूफ़ाँ के ज़ोर से वो सफ़ीने उभर गए

 

ऑडियो 5

ज़िंदगी किस मक़ाम से गुज़री

जिस को निस्बत हो तुम्हारे नाम से

नूर-ओ-निकहत की ये बरसात कहाँ थी पहले

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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