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निदा फ़ाज़ली

1938 - 2016 | मुंबई, भारत

महत्वपूर्ण आधुनिक शायर और फ़िल्म गीतकार। अपनी ग़ज़ल ' कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ' के लिए प्रसिध्द

महत्वपूर्ण आधुनिक शायर और फ़िल्म गीतकार। अपनी ग़ज़ल ' कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ' के लिए प्रसिध्द

ग़ज़ल

कभी कभी यूँ भी हम ने अपने जी को बहलाया है

जगजीत सिंह

कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया

निदा फ़ाज़ली

गरज बरस प्यासी धरती फिर पानी दे मौला

फ़हद हुसैन

जिसे देखते ही ख़ुमारी लगे

निदा फ़ाज़ली

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

समीर खेरा

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

समीर खेरा

बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता

फ़हद हुसैन

बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ

निदा फ़ाज़ली

आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया

नोमान शौक़

आनी जानी हर मोहब्बत है चलो यूँ ही सही

नोमान शौक़

उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी है

नोमान शौक़

एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा

नोमान शौक़

कुछ दिनों तो शहर सारा अजनबी सा हो गया

नोमान शौक़

कठ-पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत

नोमान शौक़

काला अम्बर पीली धरती या अल्लाह

नोमान शौक़

कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है

नोमान शौक़

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया

नोमान शौक़

चाहतें मौसमी परिंदे हैं रुत बदलते ही लौट जाते हैं

नोमान शौक़

जब भी किसी ने ख़ुद को सदा दी

नोमान शौक़

जो हो इक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता

नोमान शौक़

नज़दीकियों में दूर का मंज़र तलाश कर

नोमान शौक़

मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ

नोमान शौक़

मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं

नोमान शौक़

ये जो फैला हुआ ज़माना है

नोमान शौक़

यक़ीन चाँद पे सूरज में ए'तिबार भी रख

नोमान शौक़

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो

नोमान शौक़

हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए

नोमान शौक़

नज़्म

आदमी की तलाश

नोमान शौक़

इत्तिफ़ाक़

नोमान शौक़

खेलता बच्चा

नोमान शौक़

पैदाइश

नोमान शौक़

बे-ख़्वाब नींद

नोमान शौक़

वालिद की वफ़ात पर

फ़हद हुसैन

वालिद की वफ़ात पर

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI