aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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राशिद आज़र

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'अजीब जुम्बिश-ए-लब है ख़िताब भी न करे

तुम्हारा नाम ले कर दर-ब-दर होता रहूँगा

मुंतज़िर आँखों में जमता ख़ूँ का दरिया देखते

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