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तौहीद ज़ेब का परिचय

रुख़-ए-‘आलम को पेश-ओ-पस कर दें ये जुनूँ-पेशा

ख़ुदा ने आदमी को वक़्फ़े वक़्फ़े से पुकारा है

तौहीद ज़ेब, जिनका असली नाम शाह ज़ेब नाज़ुक है, 16 अप्रैल 1997 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहीम यार खान जिले की तहसील लियाकतपुर के मौज़ा तरंडा मीर खान में पैदा हुए। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं से प्राप्त की और गवर्नमेंट सादिक एगर्टन कॉलेज, बहावलपुर से एम.एससी. बॉटनी (M.Sc. Botany) की पढ़ाई पूरी की।

तौहीद ज़ेब की ग़ज़लों में गैर-पारंपरिक शब्दों का रचनात्मक उपयोग, समकालीन वैश्विक स्थिति की समझ, अभिव्यक्ति की सहजता और विशेष रूप से ग़ज़लों के मतले (प्रारंभिक शेर) उनकी रचनात्मक बेचैनी, जिज्ञासा और पारंपरिक सांचों से असंतोष का पता देते हैं। यही असंतोष उनकी कविताओं में सीधी अभिव्यक्ति का कारण भी बनता है। उनकी लंबी कविता "बख्तावर" और कई अन्य कविताएं, रूमानी माहौल रखने के बावजूद केवल रूमानी नहीं हैं। संभव है कि ये किसी व्यक्तिगत अनुभव की गूंज हों, लेकिन अपने रचनात्मक रंग में ये सामूहिक मानवीय अनुभव के साथ एकाकार हो गई हैं।

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