ग़ज़ल 4

 

शेर 5

कैसे उस को दिल की हालत समझाऊँ

बात करूँ तो आँख चुराने लगता है

मुझ को दुनिया से बे-ख़बर कर दे

देख ले मुझ को मो'तबर कर दे

देख उसे सब ज़िक्र हमारा करते हैं

उस की आँख में सिर्फ़ हमारा चेहरा है

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