ग़ज़ल 4

 

शेर 4

पलकें हैं कि सरगोशी में ख़ुश्बू का सफ़र है

आँखों की ख़मोशी है कि आवाज़ का चेहरा

मैं वक़्त के कोहराम में खो जाऊँ तो क्या ग़म

ढूँडेगा ज़माना मिरी आवाज़ का चेहरा

सिमटे रहे तो दर्द की तन्हाइयाँ मिलीं

जब खुल गए तो दहर की रुस्वाइयाँ मिलीं

पुस्तकें 4

Aasman Ka Pairahan

 

1986

इक़बाल - जहान-ए-नौ की तलाश में

 

2005

Parindon Ke Saeban

 

2015

Shahr-e-Saba

 

2003

 

"हैदराबाद" के और शायर

  • जलील मानिकपूरी जलील मानिकपूरी
  • अमीर मीनाई अमीर मीनाई
  • सफ़ी औरंगाबादी सफ़ी औरंगाबादी
  • वली उज़लत वली उज़लत
  • शफ़ीक़ फातिमा शेरा शफ़ीक़ फातिमा शेरा
  • राशिद आज़र राशिद आज़र
  • क़ुली क़ुतुब शाह क़ुली क़ुतुब शाह
  • रियासत अली ताज रियासत अली ताज
  • मख़दूम मुहिउद्दीन मख़दूम मुहिउद्दीन
  • कविता किरन कविता किरन