ग़ज़ल 3

 

शेर 3

दिल की ज़ख़्मों को किया करता है ताज़ा हर-दम

फिर सितम ये है कि रोने भी नहीं देता है

ख़ून-ए-जिगर आँखों से बहाया ग़म का सहरा पार किया

तेरी तमन्ना की क्या हम ने जीवन को आज़ार किया

बात जब है कि हर इक फूल को यकसाँ समझो

सब का आमेज़ा वही आब वही गिल भी वही

 

पुस्तकें 3

दिल्ली के 50 सहाफ़ी

 

2015

दिल्ली के उर्दू सहाफ़ी

आज़ादी के बाद

2013

Dilli Jo Ek Shahar Hai

 

2019

 

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