आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",sAyG"
अत्यधिक संबंधित परिणाम ",sayG"
ग़ज़ल
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँ
रोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो
हाकिम-ए-शहर भी मजमा-ए-आम भी
तीर-ए-इल्ज़ाम भी संग-ए-दुश्नाम भी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम ",sayG"
नज़्म
निसार मैं तेरी गलियों के
है अहल-ए-दिल के लिए अब ये नज़्म-ए-बस्त-ओ-कुशाद
कि संग-ओ-ख़िश्त मुक़य्यद हैं और सग आज़ाद
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शेर
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँ
रोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
न गँवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल-ए-रेज़ा-रेज़ा गँवा दिया
जो बचे हैं संग समेट लो तन-ए-दाग़-दाग़ लुटा दिया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ए'तिराफ़
संग को गौहर-ए-नायाब-ओ-गिराँ जाना था
दश्त-ए-पुर-ख़ार को फ़िरदौस-ए-जवाँ जाना था



