aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "منم"
मन्नू लाल सफ़ा लखनवी
died.1870
शायर
मुन्नी बाई हिजाब
born.1860
मुकेश शर्मा मनमौजी
born.1984
मीम मारूफ़ अशरफ़
born.1999
प्रशान्त मिश्रा मन
born.1989
मुन्नू भाई
लेखक
अनुज नागेंद्र
born.1976
क़द्र औरंगाबादी
died.1785
जय मनी सरशार
मन्नू भंडारी
1931 - 2021
मीर क़मरूद्दीन मन्नत
died.1774
जवाँ संदेलवी
1889 - 1974
मनन शाह वारसी
मुन्ने ख़ाँ आज़िम
born.1948
मुन्नी बेगम
born.1970
कलाकार
تڑپاتا تھا جگر کو جو شور آبشار کا گردن پھرا کے دیکھتا تھا منہ سوار کا...
پر توِ غیری ندارم، ایں منم پس بگوید آفتاب ای نارشید...
ग़दर के बाद से दिल्ली पर कुछ ऐसी साढ़ सती आई कि अव्वल तो पुराने घरों का नाम-ओ-निशान ही मिट गया। न मकान रहे न मकीं। सारा शहर ही बारह बाट हो गया। और जिनकी नाल नहीं उखड़ी वो पेट की ख़ातिर तितर बितर हुए। रोटी की तलाश में जिसको...
یہ بات متفقہ طور پر مانی جاتی ہے اورخودکبیر نے اس کا اعتراف کیا ہے کہ وہ ان پڑھ تھے لیکن ان کی پیدائش اور موت کی طرح ان کی شاگردی کے متعلق بھی اختلاف رائے ہے۔ مسلم روایت انہیں ایک صوفی پیر تقی کا شاگرد قرار دیتی ہے لیکن...
منم آن بادیان کشتی شکستہ برہنہ بر سر لوح نشستہ...
नूनमीम राशिद उर्दू के प्रमुख शायरों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी ख़ूबसूरत और सजावटी शैली से इस विधा को वास्तविक पहचान दी है। इस संग्रह में उनकी कविताओं के चयन के साथ-साथ उन कविताओं की नाटकीय रिकॉर्डिंग भी शामिल है, ताकि आप इन नज़्मों को सुन कर भी लुत्फ़ उठा सकें।
मिज़ाहिया शायरी बयकवक़्त कई डाइमेंशन रखती है, इस में हंसने हंसाने और ज़िंदगी की तल्ख़ियों को क़हक़हे में उड़ाने की सकत भी होती है और मज़ाह के पहलू में ज़िंदगी की ना-हमवारियों और इन्सानों के ग़लत रवय्यों पर तंज़ करने का मौक़ा भी। तंज़ और मिज़ाह के पैराए में एक तख़्लीक़-कार वो सब कह जाता है जिसके इज़हार की आम ज़िंदगी में तवक़्क़ो भी नहीं की जा सकती। ये शायरी पढ़िए और ज़िंदगी के इन दिल-चस्प इलाक़ों की सैर कीजिए।
सूफ़ीवाद ने उर्दू शायरी को कई तरह से विस्तार दिया है और प्रेम के रंगों को सूफ़ीयाना-इश्क़ के संदर्भों में स्थापित किया है। असल में इशक़ में फ़ना का तसव्वुर, इशक़-ए-हक़ीक़ी से ही आया है। इसके अलावा हमारे जीवन की स्थिरता, हमारी सहिष्णुता और मज़हबी कट्टरपन की जगह सहनशीलता का परिचय आदि ने सूफ़ीवाद के माध्यम से भी उर्दू शायरी को माला-माल किया है। दिलचस्प बात ये है कि तसव्वुफ़ ने जीवन के हर विषय को प्रभावित किया जिसके माध्यम से शायरों ने कला की अस्मिता को क़ायम किया। आधुनिक युग के अंधकार में सूफ़ीवाद से प्रेरित शायरी का महत्व और बढ़ जाता है।
मनमمَنَم
(लाक्षणिक) गर्व, गुरूर, घमंड, शेखी
मिनमمِنَم
चुगु़लखोर, बुराई करने वाला
मनम करनाمَنَم کَرنا
घमंड करना, गर्व करना, इतराना
मनम खोनाمَنَم کھونا
अहंकार टूटना, घमंड कम होना, अहंकार भूल जाना
Bayaz Syed Abdul Hakeem Saif Manam
मोहम्मद इस्तिफ़ा ख़ाँ
सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
मन-ओ-यज़दाँ
नियाज़ फ़तेहपुरी
इस्लामियात
मन-ओ-यज़दाँ
लेख
Man Mela
मोहम्मद बख़्श
शायरी
Urdu Nazmon Mein Qaumiyat Aur Watniyat
नरेंदर नाथ वीर मनी
नज़्म तन्क़ीद
बच्चे मन के सच्चे
साहिर लुधियानवी
नज़्म
Man Shah-e-Jahanam
एजाज़ अरशद क़ासमी
पत्रकारिता
Man Lagan
क़ाज़ी महमूद बेहरी
मसनवी
Man Aanam
फ़िराक़ गोरखपुरी
पत्र
Aqalmand Barahman Aur Dusari Kahaniyan
कहानी
Ana Min-al-Husain
रईस अमरोहवी
मर्सिया
Dilmun
याक़ूब यावर
ऐतिहासिक
Man-o-Yazdan
Sanwle Man Bhanwle
शेर अफ़ज़ल जाफ़री
काव्य संग्रह
Samaji Tabdiliyan
डॉ. राम शरण शर्मा
منم کہ توبہ نہ کردم ز فاش گوئي ہا ز بيم ايں کہ بسلطاں کنند غمازي
नहीं है ग़ैर की तस्बीह का कोई इम्काँमिरे लबों पे तो ज़िक्र-ए-मनम मनम है अभी
قول فیصل: واؤ کا اضافہ کتابت میں صرف اس لیے کیا گیا کہ عمر بمعنی زندگی بسکون میم اور عمر بمعنی نام بضم اول و سکون دوم میں فرق ہو جائے۔ واؤ صرف مکتوبی تھا، ملفوظی نہ تھا۔ عوام اور جہلا نے ملفوظی کر لیا۔ فصحائے لکھنؤ بفتح اول و...
मजनूँ मनम चिरा दिगरे रंज मी बुरददर हिस्सा-ए-मन आमदा लैला-ए-शाएरी
وہ بھی استاد تم بھی اک استاد ’’آیات وجدانی‘‘ کے دیباچے میں یگانہ صاحب کی غالب شکنی کا جواز یہ کہہ کر پیش کیا گیا ہے کہ غالب کے مرتبے سے ناآشنا لوگ جھوٹ موٹ غالب کی تعریفیں کیا کرتے ہیں اور خواہ مخواہ آتش پر منہ آیا کرتے ہیں...
रब्त-ए-दिली से ख़ल्क़ को अब वास्ता कहाँअब तो हमा-शुमा भी असीर-ए-मनम हुए
جیسے شعر جو ظفر اقبال کی یاد دلاتے ہیں اور جن میں ’’اینٹی غزل‘‘ کا سراغ ملتا ہے، اسی مجموعی ذہنی کا ماحول کا حصہ ہے جو یگانہ کی شخصیت کی طرح بلندوپست یا مزاح اور سنجیدگی کی خانہ بندی سے ماورا اور آزاد ہے اور زندگی کو اس کے...
حال سے بے اطمینانی اور عصری زندگی سے ناسودگی ہر بڑے شاعر کے ہاں ایک مکمل تر حیات کی آرزومندی کا روپ دھار لیتی ہے۔ اگر شاعر فلسفی بھی ہو یعنی اس کی فکر اس کے جذبات پر غالب ہو تو وہ ایک باقاعدہ، مربوط اور منظم نظامِ حیات کی...
پھر ایک دن ککو نے عجیب بات کہہ دی۔ جمعے کا روز تھا۔ اماں حسبِ عادت شکورے کے ہاتھ میں بانس تھمائے جالے لیتی پھر رہی تھیں۔ ان کا کہنا تھا میرے قلب پر جالے پڑنے لگتے ہیں، مکڑی کے ان جالوں کو دیکھ کر۔ بھئی ہے یہ کہ خدا...
ایران کی عشقیہ شاعری کا مطالعہ کرنے والا جب یہ دیکھتا ہے کہ وہاں کے ہرشاعر کا کلام جفائے محبوب کے ذکر سے بھرا پڑا ہے تو وہ حیران رہ جاتا ہے اور قدرتی طور پر اس کے دل میں یہ سوالات پیدا ہوتے ہیں کہ، (۱) کیا حسن و...
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