आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ".ark"
अत्यधिक संबंधित परिणाम ".ark"
ग़ज़ल
मैं चाहत एक ऐसे मोड़ पर लाने का क़ाइल हूँ
जहाँ पर चाहने वाला ये कहता है जुदाई दे
सागर हुज़ूरपूरी
नज़्म
साक़ी
ख़त-ए-पैमाना अरक़-ए-मौज-ए-सहबा होता जाता है
इजाज़त हो कि अब आगे ख़ुदा का नाम है साक़ी
शमीम फ़ारूक़ बांस पारी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम ".ark"
समस्त
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम ".ark"
हास्य
ये मेरी अर्क़-रेज़ी से तो कुछ नम हो गई है
अब इस बंजर ज़मीं में ख़्वाह-मख़ाह में
ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी
नज़्म
कोई सूरत ऐसी
सामने आ जा मगर धीमी ज़रा साँस की लौ
और सुलगा दे कोई बीते समय का संदल
मोहम्मद ज़ुबैर ख़ालिद
नज़्म
‘‘कल-ड-सैक’’ बंद गली
'अर्क़-ए-जिस्म-ओ-जाँ को सूरज की क़रा'-अंबीक़ में
रोज़ रखते हैं उबलने के लिए














