aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aabid"
आबिद अदीब
born.1937
शायर
राकिब मुख़्तार
born.1987
आबिद जाफ़री
आबिद उमर
born.1977
शबनम शकील
1942 - 2013
सईद शहीदी
1914 - 2000
सय्यद आबिद अली आबिद
1906 - 1971
आबिद मलिक
born.1978
इरफ़ान आबिद
born.1993
आबिद मुनावरी
born.1938
आबिद वदूद
born.1953
आबिद आलमी
आबिद अख़्तर
1939 - 1995
सालिहा आबिद हुसैन
1913 - 1988
लेखक
उम्मीद फ़ाज़ली
1923 - 2005
जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब केउसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा
सफ़र में ऐसे कई मरहले भी आते हैंहर एक मोड़ पे कुछ लोग छूट जाते हैं
सौम ज़ाहिद को मुबारक रहे आबिद को सलातआसियों को तिरी रहमत पे भरोसा करना
ये क्या पड़ी है तुझे दिल जलों में बैठने कीये उम्र तो है मियाँ दोस्तों में बैठने की
आबिदा परवीन की गाई हुईं 20 मशहूर ग़ज़लें
मीराजी उर्दू अदब में अपने बिल्कुल मुख़्तलिफ़ रंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी शायरी में इन्सानी वुजूद, उसके कर्ब और अज़िय्यत की रूदाद और मौजूदगी का बैन सुनाई देता है। हमने, उर्दू शायरी के बा-ज़ौक़ क़ारिईन के लिए मीराजी की दस बेहतरीन नज़्मों का इन्तेख़ाब किया है। पढ़िए और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कीजिए।
उम्मीद में जीवन की आस हमारी इच्छा और आकांक्षा सब शामिल हैं । उम्मीद असल में जीवन को सहारा देने वाली और आगे बढ़ाने वाली अवस्था का नाम है । एक ऐसी अवस्था जो धुंद की तरह होती है उसमें कुछ साफ़ दिखाई नहीं देता लेकिन रौशनी का धोका रहता है । जिस तरह हाथ से सब कुछ निकल जाने के बाद भी एक उम्मीद हमें ज़िंदा रखती है ठीक उसी तरह प्रेमी के लिए भी उम्मीद किसी संपत्ति से कम नहीं । प्रेमी उम्मीद के सहारे ही ज़िंदा रहता है और तमाम दुखों के बावजूद उसे उम्मीद रहती है कि उसका प्रेम उसको मिल कर रहेगा । यहाँ उम्मीद से संबंधित चुनिंदा शायरी को पढ़ते हुए आप महसूस करेंगे कि ये मुश्किल वक़्तों में हौसला देने वाली शायरी भी है ।
'आबिदعابِد
तपस्वी, पूजा अर्चना करने वाला
आबादآباد
बसा हुआ मकान या जगह, वीरान अर्थात निर्जन का विलोम
उमीदاُمِید
उम्मीदاُمِّید
इच्छा, कामना, अभिलाषा
Al-Bayan
भाषा
Usloob
आलोचना
Usool-e-Intiqad-e-Adabiyat
भाषा एवं साहित्य
Al-Badi
Hindustan Islam Ke Saye Mein
सय्यद आबिद अली वज्दी अल-हुसैनी
भारत का इतिहास
Parda-e-Ghaflat
सय्यद आबिद हुसैन
नाटक / ड्रामा
अलताफ़ हुसैन हाली
महिलाओं की रचनाएँ
Main Sahir Hoon
चन्दर वर्मा
आत्मकथा
तलमीहात-ए-इक़बाल
शोध
Guldasta-e-Muhavaraat-e-Urdu
आबिद हुसैन ख़ाँ
मुहावरे / कहावत
ख़वातीन-ए-कर्बला
मर्सिया तन्क़ीद
Angrezi Grammar
जईम आबिद
Fiction Ki Tanqeed
आबिद सुहैल
फ़िक्शन तन्क़ीद
Jo Yad Raha
Silsila-e-Roz-o-Shab
हालात कह रहे हैं कि अब वो न आएँगेउम्मीद कह रही है ज़रा इंतिज़ार कर
अमीर-ए-कारवाँ है तंग हम सेहमारा रास्ता सब से अलग है
कहीं आबिद बना कहीं ज़ाहिदकहीं रिंदों का पेशवा देखा
जिन्हें ये फ़िक्र नहीं सर रहे रहे न रहेवो सच ही कहते हैं जब बोलने पे आते हैं
कहीं ऐसा न हो यारब कि ये तरसे हुए आबिदतिरी जन्नत में अश्या की फ़रावानी से मर जाएँ
ख़मोश रहने की आदत भी मार देती हैतुम्हें ये ज़हर तो अंदर से चाट जाएगा
हम फ़क़ीरों का पैरहन है धूपऔर ये रात अपनी चादर है
या अहल-ए-दुनिया से अलगइक आबिद-ए-उज़्लत-गुज़ी
(मुक़ाम दिल्ली 1856 ईसवी) रावी 1850 ई. तक दिल्ली और लखनऊ की महफ़िलों पर बहार थी, हर तरफ़ शे’र-ओ-सुख़न का चर्चा था। इसमें कोई शक नहीं कि सियासी तौर पर आज़ाद के अलफ़ाज़ में दरख़्त-ए-इक़बाल को दीमक लग चुकी थी। लेकिन अभी बर्ग-ओ-बार की शगुफ़्तगी और ताज़गी को देखते हुए...
ज़माना मुझ से जुदा हो गया ज़माना हुआरहा है अब तो बिछड़ने को मुझ से तू बाक़ी
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