aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aable"
इब्न-ए-इंशा
1927 - 1978
शायर
आल-ए-अहमद सुरूर
1911 - 2002
लेखक
आले रज़ा रज़ा
1896 - 1978
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
1923 - 2009
इब्न-ए-सफ़ी
1928 - 1980
आल-ए-उमर
born.1995
इब्न-ए-मुफ़्ती
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
born.1980
इब्ने कंवल
1957 - 2023
इब्न-ए-सीना
980 - 1037
मुहीउद्दीन इब्ने अरबी
1161 - 1240
शकील इबन-ए-शरफ़
इब्न-ए-मुनीब
born.1979
अल्लामा इबन-ए-कसीर
इबन-ए-हनीफ़
बोलते क्यूँ नहीं मिरे हक़ मेंआबले पड़ गए ज़बान में क्या
रात बीती तो गिने आबले और फिर सोचाकौन था बाइस-ए-आग़ाज़-ए-सफ़र शाम के बा'द
जो दश्त में भी जलाते थे फ़स्ल-ए-गुल के चराग़मैं शहर में भी वही आबले तलाश करूँ
तू ही बरहना-पा नहीं इस जलती रेत परतलवों में जो हवा के हैं वो आबले भी देख
मिलिए उर्दू अदब के एक अनोखे शायर से। ये उनकी नज़मों का कलेक्शन है। पढ़िए और महज़ूज़ होते रहिए।
‘याद’ को उर्दू शाइरी में एक विषय के तौर पर ख़ास अहमिय हासिल है । इस की वजह ये है कि नॉस्टेलजिया और उस से पैदा होने वाली कैफ़ीयत, शाइरों को ज़्यादा रचनात्मकता प्रदान करती है । सिर्फ़ इश्क़-ओ-आशिक़ी में ही ‘याद’ के कई रंग मिल जाते हैं । गुज़रे हुए लम्हों की कसक हो या तल्ख़ी या कोई ख़ुश-गवार लम्हा सब उर्दू शाइरी में जीवन के रंगों को पेश करते हैं । इस तरह की कैफ़ियतों से सरशार उर्दू शाइरी का एक संकलन यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है ।
अगर आप हिज्र की हालत में हैं तो ये शायरी आप के लिए ख़ास है। इस शायरी को पढ़ते हुए हिज्र की पीड़ा एक मज़ेदार तजुर्बे में बदलने लगेगी। ये शायरी पढ़िए, हिज्र और हिज्र ज़दा दिलों का तमाशा देखिए।
आबले آبْلے
छाले, फफोले
able able
अह्ल
आस्ते آسْتے
آہستہ (رک) كا تلفظ (اكثر تكرار كے ساتھ مستعمل)
आधे آدھے
दो समान भागों में से एक, आधा भाग, अर्ध
Aable
अहमद नदीम क़ासमी
अफ़साना
शिक्षाप्रद
रेहबर ताबानी
काव्य संग्रह
मदहोश बिलग्रामी
Aab-e-Gum
मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी
गद्य/नस्र
Urdu Afsana
अफ़साना तन्क़ीद
Alipur Ka Ailee
मुमताज़ मुफ़्ती
नॉवेल / उपन्यास
Aab-e-Rawan
ज़फ़र इक़बाल
ग़ज़ल
Mujarrabat-e-Bu Ali Sina
तिब्ब-ए-यूनानी
Muqaddama-e-Tareekh-e-Ibn-e-Khaldun
अब्दुर्रहमान इब्न-ए-ख़लदून
इतिहास
Awara Gard
इब्न-ए-आदम
जासूसी
Kamil Ibn-e-Aseer
इस्लामियात
Safar Nama-e-Ibn-e-Batoota
इब्न-बतूता
सफ़र-नामा / यात्रा-वृतांत
Tarjuma-o-Sharh-e-Kulliyat-e-Qanoon-e-Ibn-e-Seena
कुल्लियात
आब-ए-हयात
मोहम्मद हुसैन आज़ाद
आबले अपने ही अँगारों के ताज़ा हैं अभीलोग क्यूँ आग हथेली पे पराई लेते
गो आबले हैं पाँव में फिर भी ऐ रहरवोमंज़िल की जुस्तुजू है तो जारी रहे सफ़र
ख़ुद हैं अपने सफ़र की दुश्वारीअपने पैरों के आबले हैं हम
आबले की सी तरह ठेस लगी फूट बहेदर्दमंदी में गई सारी जवानी उस की
ये रोए फूट फूट के पानी के आबलेनाला सा एक सू-ए-बयाबान बह गया
पाँव में ज़ंजीर काँटे आबलेऔर फिर हुक्म-ए-सफ़र है क्या करूँ
पड़ जाएँ मिरे जिस्म पे लाख आबले 'अकबर'पढ़ कर जो कोई फूँक दे अप्रैल मई जून
उज़्लत-गुज़ीन-ए-बज़्म हैं वामांदागान-ए-दीदमीना-ए-मय है आबला पा-ए-निगाह का
पाँव में आबले थे थकन उम्र भर की थीरुकना था बैठना था प चलना पड़ा मुझे
मेरे दिल पर तो गिरीं आबले बन कर बूँदेंकौन सी याद के सहरा थे जो बरसात में थे
आबले ऐसे कभी फूट के ना रोए थेजिस तरह रोए हैं काँटों की कहानी सुन कर
फ़साद-ए-कोह-कनी हीला-हा-ए-परवेज़ीहज़ार रंग के काँटों में आबले हम लोग
दैर-ओ-हरम से गुज़रे अब दिल है घर हमाराहै ख़त्म इस आबले पर सैर-ओ-सफ़र हमारा
BLE (aBLE) ; DLE (bunDLE); GLE (bunGLE); KLE (tacKLE)...
मुद्दतों उस की ख़्वाहिश से चलते रहे हाथ आता नहींचाह में उस की पैरों में हैं आबले चाँद को क्या ख़बर
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