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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
आसमाँ-गीर हुआ नारा-ए-मस्ताना तिरा
किस क़दर शोख़-ज़बाँ है दिल-ए-दीवाना तिरा
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
अल्लामा इक़बाल
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ई-पुस्तक
लोक-गीत
लोक-गीत
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रेख़्ता शब्दकोश
gii
गी گی
गा का स्त्रीलिंग, उसे क्रिया के आगे लगा कर क्रिया भविष्य और एक वचन रूप के साथ बहुवचन स्त्रीलिंग बनाते हैं
Gii.n
ग़ीं غِیں
नशा करने वालों की वह घमंडी आवाज़ जो नशे की तरंग में निकलती है, बेहोशी की हालत में निकली हुई ग़ुनूदगी की आवाज़
gil
गिल گِل
गीली मिट्टी, कीचड़, गारा
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नज़्म
इबलीस की मजलिस-ए-शूरा
आब-ओ-गिल तेरी हरारत से जहान-ए-सोज़-अो-साज़़
अब्लह-ए-जन्नत तिरी तालीम से दाना-ए-कार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हसन कूज़ा-गर (1)
वो कूज़े मेरे दस्त-ए-चाबुक के पुतले
गिल-ओ-रंग-ओ-रोग़न की मख़्लूक़-ए-बे-जाँ
नून मीम राशिद
नज़्म
मस्जिद-ए-क़ुर्तुबा
इश्क़ की मस्ती से है पैकर-ए-गिल ताबनाक
इश्क़ है सहबा-ए-ख़ाम इश्क़ है कास-उल-किराम
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
जल्वा ज़ार-ए-आतिश-ए-दोज़ख़ हमारा दिल सही
फ़ित्ना-ए-शोर-ए-क़यामत किस के आब-ओ-गिल में है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
न उट्ठा फिर कोई 'रूमी' अजम के लाला-ज़ारों से
वही आब-ओ-गिल-ए-ईराँ वही तबरेज़ है साक़ी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सरहदें
किस पे शक करते हो जितने भी मुसाफ़िर हैं यहाँ
एक ही सब का क़बीला वही पैकर वही गिल
अहमद फ़राज़
नज़्म
मैं और तू
और अब संग-ओ-गिल-ओ-ख़िश्त के मलबे के तले
उसी दीवार का पिंदार है रेज़ा रेज़ा
अहमद फ़राज़
शेर
आख़िर गिल अपनी सर्फ़-ए-दर-ए-मय-कदा हुई
पहुँचे वहाँ ही ख़ाक जहाँ का ख़मीर हो
मिर्ज़ा जवाँ बख़्त जहाँदार
नज़्म
हसन कूज़ा-गर (3)
लबीब हर नवा-ऐ-साज़-गार की नफ़ी सही!)
मगर हमारा राब्ता विसाल-ए-आब-ओ-गिल नहीं, न था कभी
नून मीम राशिद
नज़्म
किसान
ख़ामुशी और ख़ामुशी में सनसनाहट की सदा
शाम की ख़ुनकी से गोया दिन की गर्मी का गिला











