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नज़्म
ख़ून फिर ख़ून है
ज़ुल्म की क़िस्मत-ए-नाकारा-ओ-रुस्वा से कहो
जब्र की हिकमत-ए-परकार के ईमा से कहो
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
अब तो उस सूने माथे पर कोरे-पन की चादर है
अम्मा जी की सारी सज-धज सब ज़ेवर थे बाबू जी
आलोक श्रीवास्तव
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नज़्म
कौन सी उलझन को सुलझाते हैं हम?
ये समझ कर जुरआ-ए-पिन्हाँ कोई
शायद आख़िर इब्तिदा-ए-राज़ का ईमा बने!
नून मीम राशिद
नज़्म
मुझे जाना है इक दिन
कोई दम में हयात-ए-नौ का फिर परचम उठाता हूँ
ब-ईमा-ए-हमिय्यत जान की बाज़ी लगाता हूँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
नाज़ ओ अदा ओ ग़म्ज़ा निगह पंजा-ए-मिज़ा
मारें हैं एक दिल को ये पिल पिल के चार पाँच
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
करे है सर्फ़ ब-ईमा-ए-शो'ला क़िस्सा तमाम
ब-तर्ज़-ए-अहल-ए-फ़ना है फ़साना-ख़्वानी-ए-शमअ'
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
मुस्लिम उम्मा का अमरीका से शिकवा
यू-एस-ए शिकवा-ए-अर्बाब-ए-वफ़ा भी सुन ले
तालिब-ए-ऐड से थोड़ा सा गिला भी सुन ले
खालिद इरफ़ान
ग़ज़ल
सुन के आमद उन की अज़-ख़ुद-रफ़्ता हो जाते हैं हम
पेशवा लेने को जाना कोई हम से सीख जाए
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
पाँव पड़ कर कहती है ज़ंजीर-ए-ज़िंदाँ में रहो
वहशत-ए-दिल का है ईमा राह-ए-सहरा लीजिए














