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ग़ज़ल
आमिर अमीर
ग़ज़ल
वो फ़रेब-ख़ुर्दा शाहीं कि पला हो करगसों में
उसे क्या ख़बर कि क्या है रह-ओ-रस्म-ए-शाहबाज़ी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
इल्तिजा-ए-मुसाफ़िर
जला के जिस की मोहब्बत ने दफ़्तर-ए-मन-ओ-तू
हवा-ए-ऐश में पाला किया जवाँ मुझ को
अल्लामा इक़बाल
गीत
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
आरज़ू लखनवी
नज़्म
जुगनू
मियान-ए-सहन लगाया था ला के इक पौदा
जो आब-ओ-आतिश-ओ-ख़ाक-ओ-हवा से पलता हुआ
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
अपनी मल्का-ए-सुख़न से
हर नक़्श-ए-पा को ताज-ए-गुलिस्ताँ किए हुए
सौ तूर इक निगाह में पिन्हाँ किए हुए
जोश मलीहाबादी
नज़्म
एक तस्वीर-ए-रंग
तू ने राहत की तमन्ना में जो ग़म पाला है
वो तिरी रूह को आबाद न होने देगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
हिण्डोला
इन्हीं फ़ज़ाओं में बचपन पला था 'ख़ुसरव' का
इसी ज़मीं से उठे 'तानसेन' और 'अकबर'
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
दिल-बस्तगी सी है किसी ज़ुल्फ़-ए-दुता के साथ
पाला पड़ा है हम को ख़ुदा किस बला के साथ









