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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो
रख़्त-ए-दिल बाँध लो दिल-फ़िगारो चलो
फिर हमीं क़त्ल हो आएँ यारो चलो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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नज़्म
वालिदा मरहूमा की याद में
रख़्त-ए-हस्ती ख़ाक-ए-ग़म की शो'ला-अफ़्शानी से है
सर्द ये आग इस लतीफ़ एहसास के पानी से है
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
लाग की आग लग उठी पम्बा तरह सा जल गया
रख़्त-ए-वजूद जान-ओ-तन कुछ न बचा जो हो सो हो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
ग़ज़ल
अहमद फ़राज़
नज़्म
आज की रात
शब्नमिस्तान-ए-तजल्ली का फ़ुसूँ क्या कहिए
चाँद ने फेंक दिया रख़्त-ए-सफ़र आज की रात
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
अपनी मल्का-ए-सुख़न से
दरिया का मोड़ नग़्मा-ए-शीरीं का ज़ेर-ओ-बम
चादर शब-ए-नुजूम की शबनम का रख़्त-ए-नम
जोश मलीहाबादी
ग़ज़ल
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
दीद के क़ाबिल है तो सही 'मजरूह' तिरी मस्ताना-रवी
गर्द-ए-हवा है रख़्त-ए-सफ़र रस्ते का शजर हम-राही है
मजरूह सुल्तानपुरी
नज़्म
इश्क़ और मौत
उड़ाती हूँ मैं रख़्त-ए-हस्ती के पुर्ज़े
बुझाती हूँ मैं ज़िंदगी का शरारा



