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ग़ज़ल
अपने जैसे दीवानों की थोड़ी तो इमदाद करूँ
सोस रहा हूँ हुश्यारी से पागल-पन ईजाद करूँ
शाहनवाज़ अंसारी
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ग़ज़ल
मोमिन ख़ाँ मोमिन
नज़्म
रक़ीब से!
जब कहीं बैठ के रोते हैं वो बेकस जिन के
अश्क आँखों में बिलकते हुए सो जाते हैं






