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ग़ज़ल
अपने जैसे दीवानों की थोड़ी तो इमदाद करूँ
सोस रहा हूँ हुश्यारी से पागल-पन ईजाद करूँ
शाहनवाज़ अंसारी
कहानी
सिद्दीक आलम
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ग़ज़ल
मोमिन ख़ाँ मोमिन
नज़्म
रक़ीब से!
जब कहीं बैठ के रोते हैं वो बेकस जिन के
अश्क आँखों में बिलकते हुए सो जाते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
क़ल्ब में सोज़ नहीं रूह में एहसास नहीं
कुछ भी पैग़ाम-ए-मोहम्मद का तुम्हें पास नहीं







