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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
ता-सर-ए-अर्श भी इंसाँ की तग-ओ-ताज़ है क्या
आ गई ख़ाक की चुटकी को भी परवाज़ है क्या
अल्लामा इक़बाल
शेर
इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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रेख़्ता शब्दकोश
taaraa
तारा تارا
आकाश में चमकनेवाला नक्षत्र। सितारा। मुहा०-तारा टूटना तारे का आकाश से अपनी कक्षा से निकलकर पथ्वी पर या आकाश में किसी ओर गिरना। तारा डबना = (क) किसी तारे या नक्षत्र का अस्त होना। (ख) शक्र का अस्त होना। (शुक्रास्तं में हिंदुओं के यहाँ मंगल कार्य नहीं किये जाते) तारा सी आँखें हो जाना-इतनी ऊँचाई या दूरी पर पहुँच जाना कि तारे की तरह बहुत छोटा जान पड़ने लगे। तारे खिलना या छिटकना = आकाश में तारों का चमकते हुए दिखाई देना। तारे गिनना चिंता, विकलता आदि से नींद न आने के कारण कष्टपूर्वक जागकर रात बिताना। (आकाश के) तारे तोड़ लाना कठिन से कठिन अथवा प्रायः असंभव से काम कर दिखाना। तारे दिखाई देना-दुर्बलता, रोग आदि के कारण आँखों के सामने रह-रहकर प्रकाश के छोटे-छोटे कण दिखाई देना। तारे दिखाना = प्रसूता स्त्री को छठी के दिन बाहर लाकर आकाश की ओर इसलिए तकाना कि भूत-प्रेत आदि की बाधा दूर हो जाय। (मुसल०) पद-तारों की छाँह-इतने तड़के या सबेरे कि तारों का धुंधला प्रकाश दिखाई दे।
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नज़्म
दो इश्क़
छोड़ा नहीं ग़ैरों ने कोई नावक-ए-दुश्नाम
छूटी नहीं अपनों से कोई तर्ज़-ए-मलामत
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
चश्मक मिरी वहशत पे है क्या हज़रत-ए-नासेह
तर्ज़-ए-निगह-ए-चश्म-ए-फ़ुसूँ-साज़ तो देखो
मोमिन ख़ाँ मोमिन
नज़्म
लौह-ओ-क़लम
इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
तस्वीर-ए-दर्द
उड़ा ली क़ुमरियों ने तूतियों ने अंदलीबों ने
चमन वालों ने मिल कर लूट ली तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ मेरी
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
ये तर्ज़ एहसान करने का तुम्हीं को ज़ेब देता है
मरज़ में मुब्तला कर के मरीज़ों को दवा देना
अकबर इलाहाबादी
ग़ज़ल
नौ-गिरफ़्तार-ए-बला तर्ज़-ए-वफ़ा क्या जानें
कोई ना-शाद सिखा दे उन्हें नालाँ होना








