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नज़्म
शिकवा
क़ौम अपनी जो ज़र-ओ-माल-ए-जहाँ पर मरती
बुत-फ़रोशीं के एवज़ बुत-शिकनी क्यूँ करती
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
इबलीस की मजलिस-ए-शूरा
हम ने ख़ुद शाही को पहनाया है जमहूरी लिबास
जब ज़रा आदम हुआ है ख़ुद-शनास-ओ-ख़ुद-निगर
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
ज़र-ओ-माल-ओ-जवाहर ले भी और ठुकरा भी सकता हूँ
कोई दिल पेश करता हो तो ठुकराना नहीं आता
अदीम हाशमी
ग़ज़ल
दिल फ़क़्र की दौलत से मिरा इतना ग़नी है
दुनिया के ज़र-ओ-माल पे मैं तुफ़ नहीं करता
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
नज़्म
रामायण का एक सीन
तन में लहू का नाम नहीं ज़र्द रंग है
गोया बशर नहीं कोई तस्वीर-ए-संग है
चकबस्त बृज नारायण
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ग़ज़ल
'अख़्तर' क़लम-ए-फ़िक्र के भी अश्क हैं जारी
क्या हाल लिखूँ अपने दिल-ए-ज़ार-ओ-हज़ीं का
वाजिद अली शाह अख़्तर
नज़्म
एक तस्वीर-ए-रंग
ऐ तरब-ज़ार जवानी की परेशाँ तितली
तू भी इक बू-ए-गिरफ़्तार है मालूम न था
साहिर लुधियानवी
नज़्म
हिण्डोला
इसी ज़मीं पे कभी शाहज़ादा-ए-'ख़ुर्रम'
ज़रा सी दिल-शिकनी पर जो रो दिया होगा
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
आज की बातें कल के सपने
बे-ज़री अपनी सदाक़त को परखती ही रही
तल गया हुस्न ज़र-ओ-सीम की मीज़ानों में
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
'फ़ैज़' जब चाहा जो कुछ चाहा सदा माँग लिया
हाथ फैला के दिल-ए-बे-ज़र-ओ-दीनार से हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
रिश्वत
रिश्वतों की ज़िंदगी है चोर-बाज़ारी के साथ
चल रही है बे-ज़री अहकाम-ए-ज़रदारी के साथ
जोश मलीहाबादी
ग़ज़ल
मर्द-ए-दरवेश का सरमाया है आज़ादी ओ मर्ग
है किसी और की ख़ातिर ये निसाब-ए-ज़र-ओ-सीम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कश्मकश
उस को रहना था ज़र-ओ-सीम के ऐवानों में
रह भी जाती वो मिरे साथ तो रहती कब तक
नरेश कुमार शाद
ग़ज़ल
सलीम कौसर
ग़ज़ल
खज़ाना-ए-ज़र-ओ-गौहर पे ख़ाक डाल के रख
हम अहल-ए-मेहर-ओ-मोहब्बत हैं दिल निकाल के रख



