Akbar Allahabadi's Photo'

अकबर इलाहाबादी

1846 - 1921 | इलाहाबाद, भारत

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

ग़ज़ल 70

नज़्म 6

शेर 126

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम

वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

I do suffer slander, when I merely sigh

she gets away with murder, no mention of it nigh

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद

अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

  • शेयर कीजिए

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ

I live in this world tho for life I do not vie

I pass through the market but I do not wish to buy

  • शेयर कीजिए

हास्य 2

 

रुबाई 54

क़ितआ 17

मुखम्मस 1

 

पुस्तकें 66

Akbar Alahabadi

Ek Samaji-o-iyasi Mutala

2011

Akbar Allahabadi

 

1983

अकबर इलाहाबादी

तहक़ीक़ी-ओ-तन्क़ीदी मुताला

2003

Akbar Allahabadi

 

1931

Akbar Allahabadi

Ek Samaji wa Siyasi Mutala

1977

Akbar Allahabadi Aur Unka Kalam

 

1964

Akbar Allahabadi Aur Unka Kalam

 

1964

Akbar Allahabadi Ke Lateefe

 

1954

Akbar Allahabadi: Ek Samaji-o-Siyasi Mutala

 

2011

Akbar Is Daur Mein

 

1952

चित्र शायरी 14

कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी खुलता नहीं हाल उन की तबीअत का ज़रा भी

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी

ख़ुदा से माँग जो कुछ माँगना है ऐ 'अकबर' यही वो दर है कि ज़िल्लत नहीं सवाल के बा'द

आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझ को तो नींद भी नहीं आती

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी

हर एक से सुना नया फ़साना हम ने देखा दुनिया में एक ज़माना हम ने अव्वल ये था कि वाक़फ़ियत पे था नाज़ आख़िर ये खुला कि कुछ न जाना हम ने

रहमान के फ़रिश्ते गो हैं बहुत मुक़द्दस शैतान ही की जानिब लेकिन मेजोरिटी है

आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझ को तो नींद भी नहीं आती

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

वीडियो 10

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
अन्य वीडियो
kahen kisse kissa e dard o gham

नय्यरा नूर

आम-नामा

नामा न कोई यार का पैग़ाम भेजिए Urdu Studio

आह जो दिल से निकाली जाएगी

अज्ञात

ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता

अज्ञात

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

कुंदन लाल सहगल

दिल मिरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला

अज्ञात

बर्क़-ए-कलीसा

अज्ञात

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

मंजरी

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

रंजीत रजवाड़ा

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

अमानत अली ख़ान

ऑडियो 21

आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते

ख़त्म किया सबा ने रक़्स गुल पे निसार हो चुकी

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • वहीद इलाहाबादी वहीद इलाहाबादी गुरु
  • शाद अज़ीमाबादी शाद अज़ीमाबादी समकालीन

"इलाहाबाद" के और शायर

  • आनंद नारायण मुल्ला आनंद नारायण मुल्ला
  • ख़्वाजा जावेद अख़्तर ख़्वाजा जावेद अख़्तर
  • फ़र्रुख़ जाफ़री फ़र्रुख़ जाफ़री
  • अफ़ज़ल इलाहाबादी अफ़ज़ल इलाहाबादी
  • ज़फ़र अंसारी ज़फ़र ज़फ़र अंसारी ज़फ़र
  • अब्दुल हमीद अब्दुल हमीद
  • आज़म करेवी आज़म करेवी
  • सुहैल अहमद ज़ैदी सुहैल अहमद ज़ैदी
  • एहतराम इस्लाम एहतराम इस्लाम
  • अजमल अजमली अजमल अजमली