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अब्दुल मजीद सालिक

1894 - 1959 | लाहौर, पाकिस्तान

मशहूर शायर और पत्रकार, अपने समय के लोकप्रिय समाचारपत्र ‘ज़मींदार’ के सम्पादक रहे. ‘ज़िक्र-ए-इक़बाल’ और ‘मुस्लिम सहाफ़त हिंदुस्तान में’ जैसी किताबें यादगार छोड़ीं

मशहूर शायर और पत्रकार, अपने समय के लोकप्रिय समाचारपत्र ‘ज़मींदार’ के सम्पादक रहे. ‘ज़िक्र-ए-इक़बाल’ और ‘मुस्लिम सहाफ़त हिंदुस्तान में’ जैसी किताबें यादगार छोड़ीं

अब्दुल मजीद सालिक

अशआर 9

तुझे कुछ इश्क़ उल्फ़त के सिवा भी याद है दिल

सुनाए जा रहा है एक ही अफ़्साना बरसों से

जो उन्हें वफ़ा की सूझी तो ज़ीस्त ने वफ़ा की

अभी के वो बैठे कि हम उठ गए जहाँ से

इश्क़ है बे-गुदाज़ क्यूँ हुस्न है बे-नियाज़ क्यूँ

मेरी वफ़ा कहाँ गई उन की जफ़ा को क्या हुआ

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चराग़-ए-ज़िंदगी होगा फ़रोज़ाँ हम नहीं होंगे

चमन में आएगी फ़स्ल-ए-बहाराँ हम नहीं होंगे

हाल-ए-दिल सुन के वो आज़ुर्दा हैं शायद उन को

इस हिकायत पे शिकायत का गुमाँ गुज़रा है

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ग़ज़ल 8

क़िस्सा 9

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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