आगरा के शायर और अदीब

कुल: 57

भाषाविद्, मीर तक़ी मीर और मीर दर्द के उस्ताद

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

महान शायर/विश्व-साहित्य में उर्दू की आवाज़/सब से अधिक लोकप्रिय सुने और सुनाए जाने वाले अशआर के रचयिता

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

शायर और साहित्यिक पत्रकार, ‘नशेमन’, ‘मशरिक़’ और ‘नई क़द्रें’ जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का सम्पादन किया. पद्य गद्य में कई कई किताबें प्रकाशित हुईं

मीर और सौदा के विवादास्पद समकालीन, दोनों शायरों की आलोचना के शिकार हुए

प्रमुख क्लासिकी शायर, मीर तक़ी ‘मीर’ के समकालीन

प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रकार और शयार जिन्होंने "शायर" जैसी साहित्यिक पत्रिका का संपादन किया

मुग़लिया सल्तनत के बादशाह शाहजहाँ की साहिबज़ादी और सूफ़ी ख़ातून, मुसन्निफ़ा शाइ’र

नाम सय्यद मुहम्मद अली शाह, तख़ल्लुस ‘मय-कश’। 3 मार्च 1902 ई को आगरा में पैदा हुए। दर्स-ए-निज़ामीयः मदरसा आलीया आगरा से पूरी की। लिखना पढ़ना ही उनका अस्ल काम था। 25 अप्रैल 1991 ई. को आगरा में इंतिक़ाल कर गए। उनकी किताबों के नाम ये हैं: मैकदा, हर्फ़-ए-तमन्ना (शेरी मजमूए), नग़्मा और इस्लाम (जवाज़-ए-समा), नक़द-ए-इक़बाल (तन्क़ीद), शिर्क-व-तौहीद (मज़हब), हज़रत ग़ौस-उल-आज़म (मज़हब), मसाएल-ए-तसव्वुफ़ (अदब)। हर्फ़-ए-तमन्ना ,नक़द-ए-इक़बाल और मसाएल-ए-तसव्वुफ़ पर उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की तरफ़ से पुरस्कार मिले। वो शाएर के अलावा आलोचक और इक़बालिया के विशेषज्ञ थे और तसव्वुफ इनका मिज़ाज था।

प्रमुख उत्तर कलासिकी शायर / अपने शेर ‘बड़े ग़ौर से सुन रहा था ज़माना...’ के लिए मशहूर

अग्रणी पूर्व-आधुनिक शायरों में विख्यात, सैंकड़ों शागिर्दों के उस्ताद।

सिलसिला-ए-अबुल-उ’लाईया के मशहूर बुज़ुर्ग और सूबा बिहार के अ’ज़ीम सूफ़ी शाइ’र

इलाहाबाद के एक मशहूर वकील थे। वे भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू के पिता थे। वे भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक कार्यकर्ताओं में से थे। जलियांवाला बाग काण्ड के बाद 1919 में अमृतसर में हुई कांग्रेस के वे पहली बार अध्यक्ष बने और फिर 1928 में कलकत्ता में दोबारा कांग्रेस के अध्यक्ष बने।

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