Abdul Aziz Fitrat's Photo'

अब्दुल अज़ीज़ फ़ितरत

1905 - 1968 | रावलपिंडी, पाकिस्तान

ग़ज़ल 5

 

नज़्म 1

 

शेर 5

और भी कितने तरीक़े हैं बयान-ए-ग़म के

मुस्कुराती हुई आँखों को तो पुर-नम करो

मरना भी नहीं है अपने बस में

जीना भी अज़ाब हो गया है

हम तो तिरे ज़िक्र का हुए जुज़्व

तू ने हमें किस तरह भुलाया

पुस्तकें 1

Kalam-e-Fitrat

 

1987

 

"रावलपिंडी" के और शायर

  • उम्मतुर्रऊफ़ नसरीन उम्मतुर्रऊफ़ नसरीन
  • विश्वनाथ दर्द विश्वनाथ दर्द
  • अख़्तर आलम अख़्तर आलम
  • हबीब अमरोहवी हबीब अमरोहवी
  • अनवर आलम सिद्दीक़ी अनवर आलम सिद्दीक़ी
  • अहमद शमीम अहमद शमीम
  • ऐश बर्नी ऐश बर्नी
  • मोहम्मद याक़ूब आसी मोहम्मद याक़ूब आसी
  • परवीन ताहिर परवीन ताहिर
  • इक़बाल तारिक़ इक़बाल तारिक़