Akhlaque Bandvi's Photo'

अख़लाक़ बन्दवी

1964 | जौनपुर, भारत

अख़लाक़ बन्दवी

ग़ज़ल 21

शेर 4

क्या तुझे इल्म नहीं तेरी रज़ा की ख़ातिर

मैं ने किस किस को ज़माने में ख़फ़ा रक्खा है

किसी के लम्स की तासीर है कि बरसों बा'द

मिरी किताबों में अब भी गुलाब जागते हैं

ज़माने से मोहब्बत का अभी तक

ये हासिल है कि कुछ हासिल नहीं है

उम्र लग जाती है इक घर को बनाने में हमें

मकड़ियाँ रोज़ ही बुन लेती हैं जाले कैसे

पुस्तकें 1

Lams

 

2017

 

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