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अश्क रामपुरी

1897 - 1950

ग़ज़ल 2

 

शेर 2

बात में बात उसी की है सुनो तुम जिस की

यूँ तो कहने को सभी मुँह में ज़बाँ रखते हैं

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इक दिन वो मिल गए थे सर-ए-रहगुज़र कहीं

फिर दिल ने बैठने दिया उम्र भर कहीं

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