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अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

1725/6 - 1772 | दिल्ली, भारत

18 वीं सदी के प्रमुख शायरों में शामिल / मीर तक़ी मीर के समकालीन

18 वीं सदी के प्रमुख शायरों में शामिल / मीर तक़ी मीर के समकालीन

ग़ज़ल 15

शेर 6

कब दर्द से दिल को ताब आया

आँखों में कहाँ से ख़्वाब आया

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मुझ से जो पूछते हो तो हर हाल शुक्र है

यूँ भी गुज़र गई मिरी वूँ भी गुज़र गई

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जुगनू मियाँ की दुम जो चमकती है रात को

सब देख देख उस को बजाते हैं तालियाँ

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पुस्तकें 3

Deewan-e-Ashraf Ali Khan Fughan

 

2003

Deewan-e-Fughan

 

1950

Deewan-e-Fughan

 

1950

 

ऑडियो 11

अक्स भी कब शब-ए-हिज्राँ का तमाशाई है

अगर आशिक़ कोई पैदा न होता

आलम में अगर इश्क़ का बाज़ार न होता

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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