ग़ज़ल 5

 

शेर 1

अश्कों के निशाँ पर्चा-ए-सादा पे हैं क़ासिद

अब कुछ बयाँ कर ये इबारत ही बहुत है

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पुस्तकें 4

अाज़ादी के बाद

 

1951

Azadi Ke Bad

 

1951

Mafhoom-e-Ghalib

 

1969

Main Mahsoos Karta Hun Sochta Hun

 

 

शोला-ए-जाँ

 

1991

Yunus Imriya

Turki Ka Azeem Awami Shair

1974

 

"इस्लामाबाद" के और शायर

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