फख़्र अब्बास

ग़ज़ल 11

नज़्म 1

 

अशआर 8

ये जो लाहौर से मोहब्बत है

ये किसी और से मोहब्बत है

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मुझे ठुकरा दिया तू ने फ़क़त शाइ'र समझ कर आज

मिरी नज़्में तिरे बच्चे सिलेबस में पढ़ें तो फिर

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मोहब्बत मुझ को ऐसा हौसला ख़ैरात कर

उस को बाज़ू से पकड़ कर कह सकूँ कि बात कर

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जब से उस की आँख में आँसू देखे हैं

तब से मुझ को पानी से डर लगता है

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सर पर ये जो छत का साया होता है

दीवारों ने बोझ उठाया होता है

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पुस्तकें 1

 

वीडियो 5

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
घर से तुम्हारी दी हुई चीज़ें निकाल दें

फख़्र अब्बास

बिल्कुल तुम सा और तुम्हारा लगता हूँ

फख़्र अब्बास

याद

आज भी जब मैं बाईक पे बैठूँ फख़्र अब्बास

रोती हुई आँखों का वो मंज़र नहीं देखा

फख़्र अब्बास

"सरगोधा" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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