ग़ज़ल 21

शेर 4

कौन बदन से आगे देखे औरत को

सब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में

तिरे गीतों का मतलब और है कुछ

हमारा धुन सरासर मुख़्तलिफ़ है

फ़ज़ा यूँही तो नहीं मल्गजी हुई जाती

कोई तो ख़ाक-नशीं होश खो रहा होगा

सितारा है कोई गुल है कि दिल है

तिरी ठोकर में पत्थर मुख़्तलिफ़ है

पुस्तकें 4

Dasht-e-Wajood

 

2006

Dasht-e-Wajood

 

2006

Dastak

 

2005

ज़िन्दा हूँ

 

2010

 

ऑडियो 5

hamiida shahiin

मिरी दुनिया का मेहवर मुख़्तलिफ़ है

रहीन-ए-ख़्वाब-ए-गुम-गश्ता हमारे सामने मत आ

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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