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अंजुम रूमानी

1920 - 2001 | लाहौर, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायरा, इक़बाल के फ़ारसी कलाम का पद्यात्मक अनुवाद भी किया

पाकिस्तानी शायरा, इक़बाल के फ़ारसी कलाम का पद्यात्मक अनुवाद भी किया

ग़ज़ल 15

शेर 18

दिल से उठता है सुब्ह-ओ-शाम धुआँ

कोई रहता है इस मकाँ में अभी

सच के सौदे में पड़ना कि ख़सारा होगा

जो हुआ हाल हमारा सो तुम्हारा होगा

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देते नहीं सुझाई जो दुनिया के ख़त्त-ओ-ख़ाल

आए हैं तीरगी में मगर रौशनी से हम

ये जितने मसअले हैं मश्ग़ले हैं सब फ़राग़त के

तुम बे-कार बैठे हो हम बे-कार बैठे हैं

आज का झगड़ा आज चुका

कल की बातें कल पर टाल

पुस्तकें 2

Iqbal Ka Muntakhab Farsi Kalam

Manzum Urdu Tarjuma

1999

Ku-e-Malamat

 

1983

 

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