Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Hamza Hassam's Photo'

युवा शायर, मुशायरों में सक्रिय भागीदारी और प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध

युवा शायर, मुशायरों में सक्रिय भागीदारी और प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध

हमज़ा हस्साम के शेर

12
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

हम दोनों एक शहर में रहने के बा-वजूद

मिलते नहीं अगर तो कोई ख़ास बात है

ये बिछड़ते वक़्त कहना चाहता था साहिबा

मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता था साहिबा

वो चाहते यही थे आज बात ख़त्म हो

सो बात ख़त्म यूँ हुई कि ख़त्म हो गई

उस साँवली को और कोई देखता था

उस साँवली को इस लिए भी देखता था मैं

मेरी हामी का फ़ाएदा ले लो

इस से पहले कि मैं मुकर जाऊँ

बड़ा मुश्किल था लेकिन वो ब-आसानी समझता था

वो चेहरा देख के मेरी परेशानी समझता था

भले वो ख़्वाब थी लेकिन हक़ीक़त नाम रक्खा था

किसी का प्यार से मैं ने 'इनायत नाम रक्खा था

तुम इतने फ़ाएदे में क्यूँ नहीं हो

मिरा नुक़्सान जितना हो गया है

तरकीब कोई हुस्न से हट कर है तो सोचो

'हस्साम' हसीनों पे तो मरता ही नहीं है

इस गहरी अज़िय्यत में यूँ बे-साख़्ता हँस कर

हम मारते हैं खींच के वहशत को तमांचे

Recitation

बोलिए