Ibn-e-Safi's Photo'

इब्न-ए-सफ़ी

1928 - 1980 | कराची, पाकिस्तान

उर्दू के सबसे बड़े जासूसी उपन्यासकार जो पहले ' असरार नारवी ' के नाम से शायरी करते थे।

उर्दू के सबसे बड़े जासूसी उपन्यासकार जो पहले ' असरार नारवी ' के नाम से शायरी करते थे।

शेर 11

लिखने को लिख रहे हैं ग़ज़ब की कहानियाँ

लिक्खी जा सकी मगर अपनी ही दास्ताँ

चाँद का हुस्न भी ज़मीन से है

चाँद पर चाँदनी नहीं होती

हुस्न बना जब बहती गंगा

इश्क़ हुआ काग़ज़ की नाव

ज़मीन की कोख ही ज़ख़्मी नहीं अंधेरों से

है आसमाँ के भी सीने पे आफ़्ताब का ज़ख़्म

दिल सा खिलौना हाथ आया है

खेलो तोड़ो जी बहलाओ

ग़ज़ल 9

पुस्तकें 46

Aamad

Goshe: Ibn-e-Safi, Wahab Ashrafi: Shumara Number-001

2012

ऑडियो 9

आज की रात कटेगी क्यूँ कर साज़ न जाम न तो मेहमान

कुछ तो तअल्लुक़ कुछ तो लगाओ

कुछ भी तो अपने पास नहीं जुज़-मता-ए-दिल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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