ग़ज़ल 15

शेर 17

उस को मतलब का जब मिला मौसम

रंग उस के थे देखने वाले

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खुला था लफ़्ज़ भी जादू-मिसाल होते हैं

वो जब गुलाब हुआ था गुलाब कहने से

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नींद मत ढूँड मेरी आँखों में

सिलवटें देख मेरे बिस्तर पर

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मोहब्बत ऐसा दरवाज़ा है 'ख़ावर'

हर इक दस्तक पे जो खुलता नहीं है

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बहुत वो साथ रहा है बहुत है याद मुझे

उसे भुलाने को 'ख़ावर' ये ज़िंदगी कम है

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