ग़ज़ल 9

शेर 2

कितने बन-बास लिए फिर भी तिरे साथ रहे

हम ने सोचा ही नहीं तुझ से जुदा हो जाना

रफ़्ता रफ़्ता ज़ेहन के सब क़ुमक़ुमे बुझ जाएँगे

और इक अंधे नगर का रास्ता रह जाएगा

 

पुस्तकें 1

Subh Aane Ko Hai

 

2000

 

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