Mushafi Ghulam Hamdani's Photo'

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

1747 - 1824 | लखनऊ, भारत

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

'मुसहफ़ी' हम तो ये समझे थे कि होगा कोई ज़ख़्म

तेरे दिल में तो बहुत काम रफ़ू का निकला

मुसहफ़ी, शेख़ ग़ुलाम हमदानी

दिल्ली के पास बल्लबगढ़ में पैदा हुए और बचपन अमरोहा में गुज़रा। शिक्षा दीक्षा दिल्ली में हुई। दिल्ली उजड़ी तो और शायरों की तरह वह भी लखनऊ चले गए। वहाँ जी नहीं लगा तो दिल्ली वापस गए लेकिन यहाँ की वीरानी ने दोबारा लखनऊ पहुँचा दिया और वहीं को हो रहे। मुसहफ़ी ने बहुत ज़ियादा शायरी की जिस में भाषा और शैलियों की जबरदस्त विभिन्नता पाई जाती है। कहा जाता है कि माली दुश्वारी के सबब अपनी ग़ज़लें बेचा करते थे। इंशा अल्लाह ख़ाँ के साथ उनकी चलती थी जिस ने दुश्मनी का रंग ले लिया था।