Mushafi Ghulam Hamdani's Photo'

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

1747 - 1824 | लखनऊ, भारत

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

ग़ज़ल

अव्वल तो तिरे कूचे में आना नहीं मिलता

फ़सीह अकमल

आज पलकों को जाते हैं आँसू

फ़सीह अकमल

जब कि बे-पर्दा तू हुआ होगा

फ़सीह अकमल

न पूछ इश्क़ के सदमे उठाए हैं क्या क्या

फ़सीह अकमल

हर-चंद कि बात अपनी कब लुत्फ़ से ख़ाली है

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI