Mushafi Ghulam Hamdani's Photo'

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

1751 - 1824 | लखनऊ, भारत

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

ग़ज़ल 268

शेर 586

'मुसहफ़ी' हम तो ये समझे थे कि होगा कोई ज़ख़्म

तेरे दिल में तो बहुत काम रफ़ू का निकला

लोग कहते हैं मोहब्बत में असर होता है

कौन से शहर में होता है किधर होता है

people say

where does this happen someone tell me where

people say

where does this happen someone tell me where

अब मिरी बात जो माने तो ले इश्क़ का नाम

तू ने दुख दिल-ए-नाकाम बहुत सा पाया

  • शेयर कीजिए

ई-पुस्तक 36

Aayat-e-Mushafi

 

1953

Aqd-e-Surayya

 

1934

अक़द-ए-सुरय्या

 

2012

Deewan-e-Mushafi

 

1990

दीवान-ए-मुस्हफ़ी

खण्ड-008

1995

Deewan-e-Mushafi

Volume-001

1966

दीवान-ए-मुसहफ़ी

खण्ड-008

1995

Hindustani Adab Ke Memar: Mushafi

 

1989

Intikhab Kalam-e-Mushafi

 

1982

Intikhab Kulliyat-e-Mushafi

 

 

वीडियो 6

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
अन्य वीडियो
Aaraam se ek din kabhi ham baithe na ghar pe

वसी शाह

go zaKHmii hai.n ham par use kyaa Gam hai hamaaraa

वसी शाह

आता है किस अंदाज़ से टुक नाज़ तो देखो

ताहिरा सैयद

ख़्वाब था या ख़याल था क्या था

जगजीत सिंह

ऑडियो 5

अव्वल तो तिरे कूचे में आना नहीं मिलता

आज पलकों को जाते हैं आँसू

जब कि बे-पर्दा तू हुआ होगा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • शैख़ अली बख़्श बीमार शैख़ अली बख़्श बीमार शिष्य
  • मन्नू लाल सफ़ा लखनवी मन्नू लाल सफ़ा लखनवी शिष्य
  • हैदर अली आतिश हैदर अली आतिश शिष्य
  • इंशा अल्लाह ख़ान इंशा अल्लाह ख़ान समकालीन
  • शैख़ अली बख़्श बीमार शैख़ अली बख़्श बीमार Nephew

"लखनऊ" के और शायर

  • इंशा अल्लाह ख़ान इंशा अल्लाह ख़ान
  • मीर हसन मीर हसन
  • मीर अनीस मीर अनीस
  • मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
  • अम्बर बहराईची अम्बर बहराईची
  • मुस्तफ़ा खां यकरंग मुस्तफ़ा खां यकरंग
  • जुरअत क़लंदर बख़्श जुरअत क़लंदर बख़्श
  • रंगीन सआदत यार ख़ाँ रंगीन सआदत यार ख़ाँ
  • इमाम बख़्श नासिख़ इमाम बख़्श नासिख़
  • हैदर अली आतिश हैदर अली आतिश