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वज़ीर अली सबा लखनवी

1795 - 1885 | लखनऊ, भारत

ग़ज़ल 28

शेर 54

दिल में इक दर्द उठा आँखों में आँसू भर आए

बैठे बैठे हमें क्या जानिए क्या याद आया

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करें आप वफ़ा हम को क्या

बेवफ़ा आप ही कहलाइएगा

हैं वो सूफ़ी जो कभी नाला-ए-नाक़ूस सुना

वज्द करने लगे हम दिल का अजब हाल हुआ

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ई-पुस्तक 3

Ghuncha-e-Arzu

 

1856

Ghuncha-e-Arzu

 

1847

Intikhab-e-Saba

 

1982

 

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