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वज़ीर अली सबा लखनवी

1795 - 1885 | लखनऊ, भारत

ग़ज़ल 28

शेर 56

दिल में इक दर्द उठा आँखों में आँसू भर आए

बैठे बैठे हमें क्या जानिए क्या याद आया

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बात भी आप के आगे ज़बाँ से निकली

लीजिए आए थे हम सोच के क्या क्या दिल में

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आप ही अपने ज़रा जौर-ओ-सितम को देखें

हम अगर अर्ज़ करेंगे तो शिकायत होगी

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करें आप वफ़ा हम को क्या

बेवफ़ा आप ही कहलाइएगा

कहते हैं मिरे दोस्त मिरा हाल देख कर

दुश्मन को भी ख़ुदा करे मुब्तला-ए-इश्क़

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पुस्तकें 3

Ghuncha-e-Arzu

 

1856

Ghuncha-e-Arzu

 

1847

Intikhab-e-Saba

 

1982

 

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