ग़ज़ल 6

नज़्म 14

शेर 8

अभी वो आँख भी सोई नहीं है

अभी वो ख़्वाब भी जागा हुआ है

फ़लसफ़े सारे किताबों में उलझ कर रह गए

दर्स-गाहों में निसाबों की थकन बाक़ी रही

मोहब्बत के ठिकाने ढूँढती है

बदन की ला-मकानी मौसमों में

पुस्तकें 20

अराबची सो गया है

 

2013

Iqbal Aur Jamaliyat

 

1964

इक़बाल और जमालियात

 

1981

Iqbal aur Jamaliyat

 

1978

Islami Saqafat

 

 

मल्बे से मिली चीज़ें

 

2013

Paighambar-e-Aazam wa Aakhir

 

1984

पानी में गुम ख़्वाब

 

2013

Pani Mein Gum Khwab

 

2002

Surmai Neend Ki Bazgasht

 

2017

चित्र शायरी 1

शब की पहनाइयों में चीख़ उठे दर्द तन्हाइयों में चीख़ उठे तह-ब-तह मुंजमिद थकन जागी जिस्म अंगड़ाइयों में चीख़ उठे धूप जब आईना-ब-दस्त आई अक्स बीनाइयों में चीख़ उठे मैं समुंदर हूँ कोई तू सीपी मेरी गहराइयों में चीख़ उठे रतजगे तन गए दरीचों पर ख़्वाब अंगनाइयों में चीख़ उठे जब पहाड़ों पे बर्फ़ गिरने लगे कोई उतराइयों में चीख़ उठे जब पुकारा किसी मुसाफ़िर ने रास्ते खाईयों में चीख़ उठे कुछ ख़मोशी से देखते थे मुझे कुछ तमाशाइयों में चीख़ उठे रात भर ख़्वाब देखने वाले दिन की सच्चाइयों में चीख़ उठे

 

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